सामग्री पर जाएँ

रेफ़रल प्रोग्राम शुरू हो गया हैरेफ़रल इनाम देखें

सभी लेख
Parent Guides → Tutoring GuidanceParents

GCSE Maths के पेपर समझिए: AQA, Edexcel और OCR

8 min read
GCSE Maths Papers title card with three tiles: Paper 1, Paper 2, Paper 3, 90 minutes each

मुख्य बातें

  • GCSE Maths में तीन पेपर होते हैं। हर एक 1 घंटा 30 मिनट का।
  • हर पेपर अंतिम ग्रेड का एक-तिहाई होता है।
  • एक पेपर बिना कैलकुलेटर होता है। कौन सा — यह परीक्षा बोर्ड पर, और OCR में स्तर पर, निर्भर है।
  • दो स्तर हैं: Foundation (ग्रेड 1 से 5) और Higher (ग्रेड 4 से 9)।
  • ताज़ा ब्योरे के लिए अपने बोर्ड की स्पेसिफ़िकेशन हमेशा देख लें।

GCSE Maths में कितने पेपर होते हैं?

छोटा जवाब: तीन पेपर होते हैं। हर एक 1 घंटा 30 मिनट का, तो परीक्षाएँ कुल 4 घंटे 30 मिनट की बनती हैं। हर पेपर ग्रेड का एक-तिहाई गिना जाता है।

इंग्लैंड के तीनों बड़े परीक्षा बोर्डों में यही है: AQA, Edexcel और OCR। मुख्य फ़र्क़ इतना है कि बिना-कैलकुलेटर वाला पेपर कौन सा है।

GCSE Maths के तीन पेपर: पेपर 1 बिना कैलकुलेटर, पेपर 2 और 3 कैलकुलेटर के साथ, हर एक 1 घंटा 30 मिनट यह AQA और Edexcel का ढाँचा है। OCR में बिना-कैलकुलेटर वाला पेपर 2 (Foundation) या पेपर 5 (Higher) है।

AQA, Edexcel और OCR में क्या अलग है?

जितना ज़्यादातर माता-पिता सोचते हैं, उससे कम। तालिका मुख्य बातें दिखाती है।

AQA, Edexcel और OCR के GCSE Maths की तुलना-तालिका: तीन पेपर, हर एक 90 मिनट का; बिना-कैलकुलेटर वाला पेपर AQA और Edexcel में पेपर 1 है, और OCR में पेपर 2 (Foundation) या पेपर 5 (Higher) बोर्डों की एक झटपट तुलना।

  • AQA: तीन पेपर। हर एक 90 मिनट और 80 अंक का। पेपर 1 बिना कैलकुलेटर। पेपर 2 और 3 में कैलकुलेटर चलता है। AQA कहता है कि पाठ्यक्रम के किसी भी हिस्से की सामग्री किसी भी पेपर में आ सकती है।
  • Edexcel: 90 मिनट के तीन पेपर। पेपर 1 बिना कैलकुलेटर।
  • OCR: 90 मिनट के तीन पेपर। Foundation के विद्यार्थी पेपर 1, 2 और 3 देते हैं, और पेपर 2 बिना कैलकुलेटर है। Higher के विद्यार्थी पेपर 4, 5 और 6 देते हैं, और पेपर 5 बिना कैलकुलेटर है।

हर पेपर के अंक बोर्ड के हिसाब से अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने बोर्ड की स्पेसिफ़िकेशन देख लें। आपके बच्चे का स्कूल बता सकता है कि वह कौन सा बोर्ड लेता है। पता न हो तो गणित के शिक्षक से पूछ लें।

Foundation और Higher स्तर क्या हैं?

आपका बच्चा तीनों पेपर एक ही स्तर पर देता है। स्तर तय करता है कि वह कौन-कौन से ग्रेड तक पहुँच सकता है।

ग्रेड 1 से 9 दिखाए गए हैं, जिनमें Foundation स्तर 1 से 5 और Higher स्तर 4 से 9 तक है Foundation: ग्रेड 1 से 5। Higher: ग्रेड 4 से 9।

  • Foundation स्तर: ग्रेड 1 से 5।
  • Higher स्तर: ग्रेड 4 से 9।

ग्रेड 4 और 5 दोनों स्तरों पर पाए जा सकते हैं। Higher के पेपर कठिन होते हैं। जिस विद्यार्थी का लक्ष्य ग्रेड 6 या उससे ऊपर है, उसे Higher चाहिए। स्तर तय होने से पहले शिक्षक से बात कीजिए। पूछिए कि वे आपके बच्चे के लिए कौन सा ग्रेड देखते हैं, और क्यों।

बिना-कैलकुलेटर पेपर क्या परखता है?

वह संख्या-बोध परखता है। आपके बच्चे को भिन्न, प्रतिशत, अनुपात और सरल बीजगणित बिना कैलकुलेटर आना चाहिए। कई विद्यार्थी यहीं अंक खोते हैं, क्योंकि रोज़ के गृहकार्य में वे कैलकुलेटर पर टिक जाते हैं।

यह एक आम प्रतिशत का सवाल है। इसे हाथ से करना ठीक रहता है।

एनिमेशन दिखाता है कि 60 पाउंड को 20 प्रतिशत कैसे बढ़ाएँ: 1.2 से गुणा करके 72 पाउंड पाइए £60 को 20% बढ़ाइए। 1.2 से गुणा कीजिए।

  1. दशमलव में 20% का मतलब 0.2 है।
  2. नया दाम 100% + 20% = 120% है।
  3. दशमलव में 120% का मतलब 1.2 है।
  4. £60 × 1.2 = £72.

यह “गुणक” की तरकीब समय बहुत बचाती है। किसी भी प्रतिशत बदलाव पर चलती है।

संख्या के अभ्यास के लिए देखिए हमारी गाइड — भिन्नों का जोड़ और घटाव और म.स. और ल.स.।

आपका बच्चा तैयारी कैसे कर सकता है?

  • पेपर के प्रकार से अभ्यास कीजिए। हर हफ़्ते बिना-कैलकुलेटर का एक सेट कीजिए।
  • पूरा हल लिखिए। अंक तरीक़े के मिलते हैं, बस अंतिम उत्तर के नहीं।
  • कमियाँ जल्दी भरिए। Year 9 में बीजगणित और भिन्नों की दिक़्क़त Year 11 में बड़ी दिक़्क़त बन जाती है।
  • गलतियाँ दोहराइए। गलतियों की एक सूची रखिए और हर हफ़्ते उसे देखिए।
  • समय लगाकर पेपर कीजिए — आख़िरी कुछ महीनों में।

परीक्षा के दिन का ढर्रा: दो बार पढ़ो, हल लिखो, आसान अंक पहले लो, आख़िरी दस मिनट में जाँचो परीक्षा के दिन का एक सरल ढर्रा।

एक-पर-एक पढ़ाई कहाँ काम आती है?

अगर आपका बच्चा किसी एक विषय पर अटका है, तो शिक्षक उसे जल्दी सुलझा सकते हैं। अगर वह सहज है, तो शिक्षक उसे ऊँचे ग्रेड की तरफ़ धकेलने में मदद कर सकते हैं।

Asymptode में कक्षाएँ सीधी, ऑनलाइन और एक-पर-एक होती हैं। आपके बच्चे को अपने हिसाब का गृहकार्य मिलता है, टिप्पणी के साथ, और माता-पिता प्रगति देख सकते हैं। हम ग्रेड की गारंटी नहीं देते। हम यह पक्का करते हैं कि आपके बच्चे को तरीक़ा समझ आ जाए।

कुछ पूछना चाहते हैं? सलाहकार से बात कीजिए या देखिए हमारी फ़ीस। यह भी पढ़िए — ऑनलाइन गणित शिक्षक कैसे चुनें।

GCSE Maths के लिए दोहराई कैसे करनी चाहिए?

दोहराई तब सबसे अच्छी चलती है जब वह सक्रिय हो। नोट्स पढ़ना आसान लगता है, पर सिखाता कम है। सवाल करना सिखाता है।

एक सरल योजना यह है:

  1. विषय लिखिए। अपने बोर्ड की स्पेसिफ़िकेशन या शिक्षक की सूची लीजिए। हर विषय को हरा, पीला या लाल कीजिए।
  2. लाल विषयों से शुरू कीजिए। सबसे ज़्यादा फ़ायदा वहीं है।
  3. सवाल कीजिए, फिर जाँचिए। बिना नोट्स एक सवाल कीजिए। फिर उसे जाँचिए और लिखिए कि कहाँ गड़बड़ हुई।
  4. विषयों को मिलाइए। परीक्षा में विषय किसी भी क्रम में आते हैं। अभ्यास भी वैसा ही कीजिए।
  5. पूरे पेपर कीजिए। समय लगाकर, और कैलकुलेटर के ठीक नियमों के साथ।

अपने ही बोर्ड के पुराने पेपर लीजिए। वे सवालों का ढंग दिखाते हैं, और मार्क स्कीम दिखाती है कि अंक किस पर मिलते हैं। स्कूल से मांगिए या बोर्ड की वेबसाइट पर देखिए।

GCSE Maths में आम गलतियाँ कौन सी हैं?

बहुत से खोए अंक छोटी आदतों से आते हैं, कठिन विषयों से नहीं। इन पर नज़र रखिए:

  • कैलकुलेटर की चूक। कैलकुलेटर को गलत मोड में चलाना, या कोष्ठक गलत टाइप करना।
  • चिह्न की गलती। बीजगणित में एक ऋण चिह्न खो देना।
  • हल न लिखना। बिना तरीक़े का गलत उत्तर कोई अंक नहीं देता। अच्छे तरीक़े वाला गलत उत्तर फिर भी कुछ अंक दे सकता है।
  • सवाल न पढ़ना। “उत्तर 2 दशमलव स्थानों तक दीजिए” या “π के रूप में” जैसे शब्द छूट जाना।
  • जाँच छोड़ देना। आख़िर में 30 सेकंड भी एक चूक पकड़ सकते हैं।

हल क्यों मायने रखता है, इसकी एक झटपट मिसाल। एक विद्यार्थी £60 का 20% निकालता है और बस “12” लिखता है। अगर असली सवाल था “£60 को 20% बढ़ाइए”, तो उत्तर £72 है। “60 × 1.2” लिखने से परीक्षक को तरीक़ा साफ़ दिख जाता है।

कैलकुलेटर वाले पेपर अच्छे से कैसे करें?

AQA और Edexcel में पेपर 2 और 3 में कैलकुलेटर चलता है। OCR में Foundation के पेपर 1 और 3 में, और Higher के पेपर 4 और 6 में। कैलकुलेटर एक औज़ार है, दिमाग़ नहीं। सही तरीक़ा तो विद्यार्थी को ही चुनना है।

  • अपना ही कैलकुलेटर सीखिए। जो मॉडल परीक्षा में रहेगा, उसी पर भिन्न, घात और कोष्ठक का अभ्यास कीजिए।
  • पहले अंदाज़ा लगाइए। अगर उत्तर अंदाज़े से बहुत दूर है, तो जाँचिए।
  • उत्तर से पहले पूरी गणना लिखिए, जिससे तरीक़े के अंक मिलें।
  • बहुत जल्दी पूर्णांक न बनाइए। आख़िर में ही पूर्णांकित कीजिए।

कैसे पता चले कि बच्चे को और मदद चाहिए?

  • अनुमानित या मॉक ग्रेड उसके लक्ष्य से नीचे हैं।
  • कक्षा में अच्छा करता है, पर समय वाले पेपरों में ख़राब।
  • बिना-कैलकुलेटर पेपर उसे बाक़ियों से बहुत कठिन लगता है।
  • वह कहता है “शिक्षक दिखाते हैं तो समझ आ जाता है”, पर अकेले नहीं कर पाता।
  • गणित का गृहकार्य बहुत लंबा खिंचता है या आँसुओं पर ख़त्म होता है।

इनमें से कोई भी बात मदद खोजने की अच्छी वजह है। जितनी जल्दी शुरू करें, कौशल धीरे-धीरे बनाने का समय उतना ज़्यादा। शिक्षक किसी अच्छे विद्यार्थी को अगले ग्रेड तक खींचने में भी मदद कर सकते हैं।

परिवार योजना कब बनाना शुरू करें?

Year 11 तक मत रुकिए। GCSE Maths पहले के सालों की बातों पर बनता है — भिन्न, अनुपात और बीजगणित। Year 8 की एक कमी Year 10 में दिक़्क़त दे सकती है।

अच्छी लय ऐसी दिखती है। Year 9 और Year 10 में बुनियाद जाँचिए और कमियाँ धीरे-धीरे भरिए। Year 11 में पुराने पेपरों और समय वाले अभ्यास पर आइए। स्कूल से मॉक के नतीजे मांगिए और देखिए कि किन विषयों में सबसे ज़्यादा अंक गए। वही विषय आपकी शुरुआती सूची हैं।

छोटा, लगातार काम आपके बच्चे के लिए बसंत की घबराहट से ज़्यादा नरम है। और इससे शिक्षक के साथ सही स्तर तय करने का समय भी मिलता है, बिना दबाव।

GCSE Maths आगे कहाँ ले जाता है?

GCSE Maths एक लंबे रास्ते के बीच में है। उससे पहले कई बच्चे 11+ देते हैं; हमारी 11 plus maths गाइड उस परीक्षा को देखती है। उसके बाद, जिन विद्यार्थियों को गणित अच्छा लगता है वे अक्सर A-Level चुनते हैं। हमारी A-Level Maths गाइड उसके पेपर, विषय और GCSE से छलांग कितनी बड़ी है — यह बताती है। GCSE में ग्रेड 7 या ऊपर एक आम प्रवेश-शर्त है, तो अपने सिक्स्थ फ़ॉर्म से पूछ लीजिए। ज़्यादातर विद्यार्थी GCSE विज्ञान भी उसी परीक्षा-सत्र में देते हैं। हमारी GCSE Combined Science गाइड उसके छह पेपर, दोहरा ग्रेड और स्तर समझाती है।

जुड़ी गाइड

आम सवाल

GCSE Maths का हर पेपर कितनी देर का है?

AQA, Edexcel और OCR — तीनों में हर पेपर 1 घंटा 30 मिनट का है।

GCSE Maths का कौन सा पेपर बिना कैलकुलेटर है?

AQA और Edexcel में पेपर 1। OCR में Foundation स्तर पर पेपर 2 और Higher स्तर पर पेपर 5।

पेपरों का भार कैसे बँटा है?

तीनों पेपरों में हर एक अंतिम ग्रेड का एक-तिहाई गिना जाता है।

GCSE Maths के स्तर कौन से हैं?

Foundation में ग्रेड 1 से 5 आते हैं। Higher में ग्रेड 4 से 9। विद्यार्थी सारे पेपर एक ही स्तर पर देता है।

क्या मुझे अपने बच्चे का परीक्षा बोर्ड जानना चाहिए?

हाँ। स्कूल से पूछिए। उससे पता चलता है कि कौन सा पेपर बिना कैलकुलेटर है और कौन सी स्पेसिफ़िकेशन लेनी है।

क्या शिक्षक GCSE Maths में मदद कर सकते हैं?

हाँ। शिक्षक कमियाँ ढूँढ सकते हैं, तरीक़े समझा सकते हैं, और अभ्यास-पेपरों पर टिप्पणी दे सकते हैं। ग्रेड की गारंटी कोई नहीं दे सकता।

स्रोत

  1. AQA GCSE Mathematics 8300: स्पेसिफ़िकेशन एक नज़र में
  2. Pearson Edexcel GCSE Mathematics (2015)
  3. OCR GCSE Mathematics J560: परीक्षकों की रिपोर्ट, पेपर 5 (Higher)
  4. OCR GCSE Mathematics J560: परीक्षकों की रिपोर्ट, पेपर 2 (Foundation)
  5. Save My Exams: GCSE Maths की परीक्षाएँ कितनी लंबी हैं?

Working with a mentor

How Asymptode can help you prepare

Asymptode teaches maths and science one-to-one, online, from Grade 1 through Grade 12 and for the SAT and AP. A mentor is matched to your child's school year and syllabus, and the class is built around what they get wrong — not around a fixed lesson plan.

  • One mentor, one student, live

    Classes are taught one-to-one by a mentor who teaches this subject at your child's school year. They can stop the moment something does not land, and start again from where it broke.

  • The gap gets found, not taught over

    Your child works problems in front of their mentor, so a wrong answer is traced back to the idea behind it instead of being marked and left. That is the part reading on your own cannot do.

  • Practice matched to that gap

    Work set after a class is written for your child's year and syllabus, and their own mentor approves every sheet before your child sees it.

  • You can see what happened

    After each class you can read what was taught, how your child got on, and what to practise next — in your own words, not a mark out of ten.

No score is promised here, and none should be: an exam result depends on the student. What a mentor changes is how quickly a misunderstanding is found and fixed.

Where this fits

See how one-on-one mentoring fits your child

A conversation with a learning expert covers how a mentor would diagnose gaps, explain reasoning and build confidence, so you know whether the fit is right before committing.

Explore see fees and talk to a learning expert

Want to go deeper with a mentor?

Reading helps. Working through problems with someone who can catch your exact mistake helps more. View fees and get started — no commitment.

View fees