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आपके बच्चे को हफ़्ते में कितने घंटे गणित की ट्यूशन चाहिए?

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Cover image: math tutoring hours per week by goal

आपके बच्चे को हर हफ़्ते कितने घंटे गणित की ट्यूशन चाहिए? ज़्यादातर विद्यार्थियों के लिए हफ़्ते में एक या दो घंटे अच्छी शुरुआत है। ठीक संख्या मक़सद पर, परीक्षा तक बचे वक़्त पर, और दो कक्षाओं के बीच कितना अभ्यास होता है इस पर निर्भर करती है।

मुख्य बातें

  • हफ़्ते में 1 घंटा कक्षा के साथ चलते रहने के लिए आम तौर पर काफ़ी है।
  • हफ़्ते में 2 घंटे उन ज़्यादातर विद्यार्थियों पर बैठते हैं जिन्हें कमियाँ भरनी हैं।
  • हफ़्ते में 2 से 3 घंटे SAT, ACT या AP की तैयारी के लिए आम है।
  • कक्षाओं के बीच छोटा अभ्यास कक्षा के वक़्त जितना ही मायने रखता है।
  • योजना हर 4 हफ़्ते में देखिए और घंटे बढ़ाइए या घटाइए।

हफ़्ते में कितने घंटे गणित की ट्यूशन काफ़ी है?

छोटा जवाब: ज़्यादातर विद्यार्थियों के लिए हफ़्ते में 1 से 2 घंटे की 1:1 गणित ट्यूशन अच्छी रहती है, एक या दो कक्षाओं में बँटी हुई। किसी बड़ी परीक्षा की तैयारी करने वाले अक्सर 2 से 3 घंटे लगाते हैं। परीक्षा से ठीक पहले की छोटी दौड़ में कुछ हफ़्तों के लिए 3 से 4 घंटे की ज़रूरत पड़ सकती है।

ये शुरुआती बिंदु हैं, नियम नहीं। हर बच्चा अलग रफ़्तार से सीखता है। सबसे अच्छी योजना वह है जिसमें सबसे कम वक़्त लगे और फिर भी लगातार प्रगति दिखे।

मक़सद से क्या बदलता है?

मक़सद सबसे बड़ा कारण है। परिवारों से बात करते वक़्त हम यह आसान मार्गदर्शन काम में लाते हैं:

मक़सद हफ़्ते में घंटे आम अवधि
कक्षा के साथ चलते रहना 1 लगातार, पूरे स्कूली साल
सीखने की कमियाँ भरना 2 क़रीब 8 से 12 हफ़्ते, फिर समीक्षा
SAT, ACT या AP की तैयारी 2 से 3 परीक्षा से क़रीब 8 से 12 हफ़्ते पहले
परीक्षा की दौड़ 3 से 4 2 से 4 हफ़्ते, फिर घटाना

मक़सद के हिसाब से ट्यूशन के घंटों की तालिका: साथ चलते रहना 1 घंटा, कमियाँ भरना 2 घंटे, SAT ACT या AP की तैयारी 2 से 3 घंटे, परीक्षा की दौड़ 3 से 4 घंटे

यह कक्षाएँ बनाने के हमारे अनुभव से निकला Asymptode का आम मार्गदर्शन है, किसी शोध का नतीजा नहीं। आपके बच्चे के शिक्षक को पहली कुछ कक्षाओं के बाद इसे ढालना चाहिए।

साथ चलते रहना

अगर आपका बच्चा कक्षा समझता है पर सहारा चाहता है, तो हफ़्ते में एक घंटा अक्सर काफ़ी है। कक्षा में अगला विषय पहले देखा जा सकता है, होमवर्क जाँचा जा सकता है, और छोटे संदेह बढ़ने से पहले साफ़ किए जा सकते हैं।

सीखने की कमियाँ भरना

गणित अपने ही ऊपर खड़ा होता है। भिन्नों की कमी बीजगणित को कठिन बना सकती है। बीजगणित की कमी कलन को कठिन बना सकती है। हफ़्ते में दो छोटी कक्षाएँ पीछे जाकर कमी ठीक करने और फिर कक्षा के साथ आ जाने का वक़्त देती हैं।

परीक्षा की तैयारी

SAT, ACT या AP जैसी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को विषय का दोहराव और समय नापकर अभ्यास — दोनों चाहिए। हफ़्ते में दो से तीन घंटे, क़रीब दो-तीन महीने तक, दोनों के लिए जगह देते हैं।

एक लंबी कक्षा दो छोटी कक्षाओं से बेहतर है?

ज़्यादातर विद्यार्थियों के लिए, दो छोटी कक्षाएँ एक लंबी कक्षा से बेहतर हैं। कारण ये हैं:

  • बच्चे 45 से 60 मिनट के टुकड़ों में बेहतर ध्यान देते हैं।
  • हफ़्ते में किसी विषय को दो बार देखना उसे ठहरने में मदद करता है।
  • शिक्षक होमवर्क जल्दी देख सकता है और ग़लतियाँ शुरू में ही ठीक कर सकता है।

भरे कार्यक्रम वाले बड़े विद्यार्थियों के लिए 60 से 90 मिनट की एक कक्षा भी चल सकती है। अहम बात नियमित संपर्क है, एक लंबा टुकड़ा नहीं।

कक्षाओं के बीच क्या होना चाहिए?

शिक्षक के साथ बीते घंटे योजना का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। कक्षाओं के बीच छोटा अभ्यास सीखे हुए को टिकाता है।

2 कक्षाओं वाले हफ़्ते का आसान ढर्रा:

  • सोमवार: 60 मिनट की कक्षा
  • मंगल और बुध: रोज़ 15 मिनट अभ्यास
  • गुरुवार: 60 मिनट की कक्षा
  • शुक्रवार: 15 मिनट अभ्यास
  • शनिवार: आराम
  • रविवार: हफ़्ते का 10 मिनट का दोहराव

नमूना हफ़्ता: 60 मिनट की दो ट्यूशन कक्षाएँ, 15 मिनट के छोटे अभ्यास वाले दिन, एक आराम का दिन और रविवार को 10 मिनट का दोहराव

यह सब मिलकर क़रीब 2 घंटे ट्यूशन और एक घंटे से कम अभ्यास बनता है। बोझ हल्का है, पर लगातार — और लगातार अभ्यास ही कौशल बनाता है।

ट्यूशन के घंटे कब बढ़ाने या घटाने चाहिए?

उन संकेतों पर नज़र रखिए जो बताते हैं कि योजना बदलनी है।

वक़्त बढ़ाने पर सोचिए जब:

  • ट्यूशन के एक महीने बाद भी अंक गिरते जा रहे हों
  • किसी बड़ी परीक्षा में एक महीने से कम बचा हो
  • होमवर्क ज़रूरत से बहुत ज़्यादा वक़्त ले रहा हो
  • शिक्षक को पिछले सालों की कमियाँ मिलें

वक़्त घटाने पर सोचिए जब:

  • आपका बच्चा होमवर्क अकेले और भरोसे के साथ करे
  • परीक्षाओं के अंक कुछ समय से ठहरे हुए हों
  • आपके बच्चे की गणित वाली घबराहट कम हो
  • शुरुआती मक़सद पूरा हो चुका हो

ट्यूशन के घंटे बढ़ाने या घटाने के संकेत: अंक गिरें या परीक्षा पास हो तो वक़्त बढ़ाइए; होमवर्क अकेले हो रहा हो और आत्मविश्वास लौट आया हो तो वक़्त घटाइए

घंटे घटाना अच्छा संकेत है। ट्यूशन का मक़सद आत्मनिर्भर विद्यार्थी है, कक्षाओं का कभी न ख़त्म होने वाला सिलसिला नहीं।

साप्ताहिक ट्यूशन योजना कैसे बनाएँ?

ये चार क़दम लीजिए:

  1. मक़सद को नाम दीजिए। मिसाल के लिए, “बीजगणित 1 में बी ग्रेड से पास होना” या “SAT गणित में अपने तय अंक तक पहुँचना”।
  2. बचा वक़्त देखिए। परीक्षा तक या सत्र के अंत तक के हफ़्ते गिनिए।
  3. कक्षाओं की संख्या चुनिए। ऊपर की तालिका के हिसाब से हफ़्ते में एक, दो या तीन।
  4. छोटा अभ्यास जोड़िए। जिन दिनों कक्षा नहीं है, उनमें से ज़्यादातर दिन 10 से 15 मिनट रखिए।

फिर हर 4 हफ़्ते समीक्षा कीजिए। होमवर्क, टेस्ट के अंक और आत्मविश्वास देखिए। ज़रूरत हो तो घंटे ढाल दीजिए।

चार क़दमों में साप्ताहिक ट्यूशन योजना बनाने का एनीमेशन: मक़सद को नाम दीजिए, बचा वक़्त देखिए, कक्षाएँ चुनिए, छोटा अभ्यास जोड़िए, फिर हर 4 हफ़्ते समीक्षा कीजिए

घंटों की ठीक संख्या चुनने में मदद चाहिए? Asymptode के सलाहकार से बात कीजिए। हम आपके बच्चे के मक़सद और समय के हिसाब से एक योजना सुझाएँगे।

क्या बहुत ज़्यादा ट्यूशन उलटी पड़ सकती है?

हाँ। बहुत ज़्यादा घंटे थकान ला सकते हैं और अपने-आप अभ्यास करने का वक़्त कम कर सकते हैं। कुछ विद्यार्थी ख़ुद सवाल आज़माने के बजाय शिक्षक का इंतज़ार करने लगते हैं।

बहुत ज़्यादा ट्यूशन के संकेत:

  • आपका बच्चा कक्षाओं में थका या ऊबा लगता है
  • कक्षा से पहले होमवर्क कभी आज़माया ही नहीं जाता
  • आराम, खेल या शौक़ के लिए वक़्त ही नहीं बचता

अगर ये संकेत दिखें, तो थोड़ा घटाइए और उसकी जगह छोटा, अपने-आप किया जाने वाला अभ्यास जोड़िए।

Asymptode ट्यूशन के घंटे कैसे तय करता है?

Asymptode में हर विद्यार्थी सीखता है सीधी, 1:1 ऑनलाइन कक्षाओं में — गणित या विज्ञान के शिक्षक के साथ। शिक्षक निजी होमवर्क और उस पर टिप्पणी, देते हैं, ताकि कक्षाओं के बीच का वक़्त भी काम आए। माता-पिता प्रगति देख सकते हैं, जिससे 4 हफ़्ते की समीक्षा आसान और साफ़ रहती है।

आप अपने मक़सद और बजट के हिसाब से योजना चुन सकते हैं। विकल्प देखिए हमारे शुल्क पृष्ठ. पर।

अगर आप शिक्षक चुनने में लगे हैं, तो हमारी मार्गदर्शिका ऑनलाइन गणित शिक्षक कैसे चुनें मदद कर सकती है। और अगर गणित का डर भी दिक़्क़त का हिस्सा है, तो पढ़िए गणित की घबराहट से पार पाना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हफ़्ते में एक घंटा गणित की ट्यूशन काफ़ी है?

जो विद्यार्थी ज़्यादातर साथ चल रहा है, उसके लिए हफ़्ते में एक घंटा अक्सर काफ़ी है। बड़ी कमियों वाले या जिनकी परीक्षा नज़दीक है, उन विद्यार्थियों को आम तौर पर ज़्यादा चाहिए।

गणित की एक कक्षा कितनी लंबी होनी चाहिए?

ज़्यादातर कक्षाएँ 45 से 60 मिनट में अच्छी चलती हैं। छोटे बच्चों के लिए छोटी कक्षाएँ बेहतर हो सकती हैं। बड़े विद्यार्थी 90 मिनट तक सँभाल सकते हैं।

नतीजे दिखने में कितने हफ़्ते की ट्यूशन लगती है?

कई परिवारों को होमवर्क और आत्मविश्वास में कुछ हफ़्तों में बदलाव दिखने लगता है। अंकों में बड़े बदलाव अक्सर ज़्यादा वक़्त लेते हैं। यह कमी के आकार और अभ्यास की नियमितता पर निर्भर करता है।

क्या मेरे बच्चे को गर्मी की छुट्टियों में ट्यूशन लेनी चाहिए?

छुट्टियाँ कमियाँ भरने या आगे निकलने का अच्छा वक़्त हैं। हफ़्ते में एक-दो घंटे छुट्टियों के पिछड़ाव को रोक सकते हैं, और छुट्टी पर क़ब्ज़ा भी नहीं करते।

क्या हम आगे चलकर घंटों की संख्या बदल सकते हैं?

हाँ। अच्छी योजना लचीली होती है। हर 4 हफ़्ते प्रगति देखिए और ज़रूरत के हिसाब से घंटे ऊपर-नीचे कीजिए।

ठीक योजना ढूँढ़ने को तैयार हैं? सलाहकार से मुफ़्त बातचीत तय कीजिए या हमारा शुल्क देखिए।

Working with a mentor

How Asymptode can help you prepare

Asymptode teaches maths and science one-to-one, online, from Grade 1 through Grade 12 and for the SAT and AP. A mentor is matched to your child's school year and syllabus, and the class is built around what they get wrong — not around a fixed lesson plan.

  • One mentor, one student, live

    Classes are taught one-to-one by a mentor who teaches this subject at your child's school year. They can stop the moment something does not land, and start again from where it broke.

  • The gap gets found, not taught over

    Your child works problems in front of their mentor, so a wrong answer is traced back to the idea behind it instead of being marked and left. That is the part reading on your own cannot do.

  • Practice matched to that gap

    Work set after a class is written for your child's year and syllabus, and their own mentor approves every sheet before your child sees it.

  • You can see what happened

    After each class you can read what was taught, how your child got on, and what to practise next — in your own words, not a mark out of ten.

No score is promised here, and none should be: an exam result depends on the student. What a mentor changes is how quickly a misunderstanding is found and fixed.

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